खाने-पीने में हराम और हलाल !
बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
मेरे मोहतरम दोस्तों, बुजुर्गों, माओं, बहनों और भाइयों अस्सलामुअलैकुम व रहमतुल्लाहेबरकातहु !
आज हम जानते हैं कि हमारे रोजमर्रा जिन्दगी में जो कुछ भी खाते पीते हैं उनमें क्या हलाल होती है और क्या हराम।

वैसे तो अल्लाह तआला ने इंसानों के लिए जमीन व समन्दर में बहुत सारी चीजे पैदा की है। कुछ खाने की कुछ जेवरात और लिबास के लिए। अल्लाह तआला फरमाता है-
अल्लाह ही ने जो कुछ जमीन में है सब तुम्हारे लिए पैदा किया है। (सू0 बकरह आ0 29)
कुरान- हलाल हुए तुम्हारे लिए चौपाए मवेशी। (सू0 मायदा आ0 1)
कुरान- आज हलाल हुई तुम पर सारी साफ सुथरी चीजें और अहले किताब का खाना तुमको हलाल है और तुम्हारा खाना उनको हलाल है। (सू0 मायदा आ0 5)
इस आयते करीमा से वाजेह होता है कि जमीन पर जो कुछ है इंसान के लिए ही है। अहले किताब से मुराद वह कौम हैं जिन्होने कुरान से पहले जो किताब नाजिल हुई थी उस पर ईमान लाया है। उस कौम के लोगों का खाना पीना नबी स0 की उम्मत के लिए हलाल है। अल्लाह तआला ने इंसान की भलाई के लिए कुछ चीजों को खाने से ममानत फरमाई। कुछ चीजें इसलिए हराम हुई कि जिस्म के लिए नुकसानदेह और अकल के लिए तबाहकिन है। जैसे कि जहर है अगर इसको खा लिया जाय तो यकीनन इंसान मर जायेगा इसलिए जहर जहर खाना मना है। बाज चीजें इम्तहान के तौर पर भी हराम हुई। अल्लाह का फरमान है-
यहूदियों के जुल्म की वजह से हमने बाज चीजें इन पर हराम कर दी जो इनके लिए हलाल थी। (सू0 निसा आ0 160)
अब चलो जानते हैं कि कुरान में अल्लाह तआला ने अहम तौर पर खाने-पीने के बारे में क्या फरमाया है-
कुरान- तुम पर मुरदार और खून (बहता हुआ) और सुअर का गोस्त और हर वह चीज जिस पर अल्लाह के सिवा दूसरे (गैर अल्ला) का नाम पुकारा गया हो वह हराम है। फिर जो मजबूर हो गया और वह हद से बढ़ने वाला और ज्यादती करने वाला न हो उन पर उनके खाने में कोई गुनाह नहीं। अल्लाह बख्शिश करने वाला मेहरबान है। (सू0 बकरह आ0 173)
कुरान- तुम पर हराम किया गया मुरदार और खून (बहता हुआ) और सुअर का गोस्त और हर वह चीज जिस पर अल्लाह के सिवा दूसरे (गैर अल्ला) का नाम पुकारा गया हो और जो गला घुटने से मरा हो और जो किसी जर्ब (चोट) से मर गया हो और जो किसी ऊंची जगह से गिर कर मरा हो और जो किसी सींग के मारने से मरा हो और जिसे किसी दरिंदे ने फाड़ खाया हो लेकिन तुम जिब्ह कर डालो तो हराम नहीं और जो आस्तानों (नामजद स्थान) पर जिब्ह किया गया हो और यह भी कि पासे डालकर किस्मत मालूम करो यह गुनाह का काम है। (सू0 मायदह आ0 3)
कुरान- आप कह दीजिए कि जो कुछ अहकाम बजरिया वह्यी मेरे पास आये उनमें तो मैं कोई हराम नही पाता किसी खाने वाले के लिए जो इसको खाये। मगर यह कि मुर्दार हो, बहता हुआ खून हो, या सुअर का गोस्त हो क्योंकि यह बिल्कुल नापाक है या जो गुनाहे शिर्क का जरिया हो कि गैर अल्लाह के लिए नामजद कर दिया गया हो। फिर जो शख्श मजबूर हो जाय बशर्ते कि न तो तालिबे लज्जत हो और न ख्वाहिशमंद। वाकई आप का रब गफूरुर्रहीम है। (सू0 अनाम आ0 145)
कुरान- जो कुछ हलाल और पाकीजा रोजी अल्लाह ने तुम्हे दे रखी है उसे खाओ और अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो अगर तुम उसी की इबादत करते हो। तुम पर सिर्फ मुर्दार और खून और सुअर का गोस्त और जिस चीज पर अल्लाह के सिवा दूसरे का नाम पुकारा जाये हराम है। फिर अगर कोइ शख्श बेबश कर दिया जाय न कि वह ख्वाहिशमंद हो और न हद से गुजरने वाला हो। यकीनन अल्ला बख्शने वाला रहम करने वाला है। किसी चीज को अपनी जबान से झूठ में न कह दिया करो कि यह हलाल है यह हराम है। कि अल्लाह पर झूठी बोहतान बाधने वाला कामयाबी से महरूम ही रहते है। (स0 नहल आ0 114, 115, 116)
ऊपर की सभी आयतों में जो बतलाया गया है उनमें सबसे पहले मुर्दार चीज का बयान किया गया है यानी जो भी जानवर या परिन्दा अपनी तवी मौत मर गया हो उसका खाना हराम है। सिवाय टिड्डी और मछली के। क्योंकि यही दो चीज है जिसे बिना जिब्ह के खाना जायज और हलाल है।
हदीस- सय्यदना इब्ने अबी औफी रजि0 कहते हैं कि हमने रसू0 स0 के हमराह सात जिहाद किये जिनमें (आप स0 की मौजुदगी में) टिड्डी खाते थे। (सहीह बुखारी 5495, सहीह मुस्लिम 5045, तिर्मिज़ी 1821, 1822, अबूदाउद 3812)
हदीस- रसू0स0 के बारे में एक रिवायत मन्कूल है कि आप स0 ने फरमाया न मैं टिड्डी खाता हूं और न इस को हराम करार देता हूं। (अबूदाउद 3813)
हदीस- हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि0 कहते हैं कि रसू0 स0 ने फरमाया है कि तुम्हारे लिए दो मुरदार और दो खून हलाल कर दिए गये हैं। यह कि मुरदार मछली और टिड्डी। दो खून ये कि कलेजी और तिल्ली। (सनन इब्नेमाजा ह0 3314)
मरी हुई मछली के बारे में कुछ एहतियात फोकहा की जानिब से यह है कि जो मछली पानी में अपनी मौत मरकर उल्टे पेट तैरने लगे यानी मछली का पेट ऊपर हो जाय और पानी के ऊपर तैर जाय तो उस मछली का खाना हराम है।
आयते करीमा में दूसरी चीज बहता हुआ खून हराम बतलाया गया है। यानी जिब्ह के वक्त जो रगों से खून बहता है वह हराम है। यह खबासत का काम है।
कुरान- और अल्लाह तआला इन पर खबीसत की चीजें हराम करता है। (सू0 आराफ आ0 157)
दो चीज ऊपर हदीस बयान की गई है। कलेजी और तिल्ली जो खून का लोथड़ा ही होता है उसका खाना जायज और हलाल है।
आगे कुराने करीम में गैर अल्लाह के नाम के चीजों को हराम करार दिया है इसके दो पहलू हैं। एक तो यह कि वह जानवर जो जिब्ह के वक्त अल्लाह के सिवा किसी और का नाम पुकारा जाय। वह जानवर खाना हराम है। और दूसरा पहलू हर वह चीज है जिस पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम ले लिया गया हो। इसमें जानवर भी सामिल हैं। अब जानवर के अलावा और कोई चीज तो जिब्ह नही की जाती है। इसलिए गैर अल्लाह के नाम की कोई भी चीज खाना हराम है। अब अगर कोई चीज या जानवर पहले से ही हराम हो तो उस पर अल्लाह का नाम लेने से हलाल नही होगा। मसलन- सुअर हराम है अब इसे अल्लाह का नाम लेकर जिब्ह करने पर हलाल नही होगा। या बकरी बिना जिब्ह के मर जाये फिर अल्लाह का नाम लेकर जिब्ह किया जाये तो भी यह बकरी हराम ही होगी। इसी तरह कोई हलाल चीज या जानवर पहले से ही गैर अल्लाह के नाम कर दिया गया हो तो वह अल्लाह का नाम लेने से हलाल नही होगा। जैसा कि मुशरिकीन अपनी देवी देवताओं के नाम जानवर छोड़ा करते थे। और अपने फसल से देवी देवताओं का हिस्सा लगाते थे। तो अल्लाह ने उन्हें शिर्क करने वाला करार दिया।
आगे कुराने करीम में वह जानवर जो गला घुटने, चोट लगने, ऊपर से गिरने, सीग लगने से मरा हो या किसी जानवर ने फाड़ खाया हो उसका खाना हराम है। हां अगर जानवर मरने से पहले (हराम करदा जानवर को छोड़कर) उसे जिब्ह कर लिया जाय तो उसका खाना हलाल होगा।
आगे अल्लाह ने आस्तानों (स्थान) का जिक्र किया है। यानी वह जगह जहां पर गैर अल्लाह के नाम की पूजा की जाती हो। और वह जगह गैर अल्लाह के लिए मुकर्रर कर दी गई हो। ऐसे आस्तानों पर जानवर जिब्ह करना या चढ़ावा चढ़ाना हराम है चाहे उस पर अल्लाह ही का नाम लिया गया हो। जैसा कि हदीस में आया है-
हदीस- हजरत साबित बिन जहाक रजि0 से रिवायत है कि एक शख्श ने बवाना मुकाम पर ऊंट जिब्ह करने की नज्र मानी चुनान्चे इसके मुताल्लिक आप स0 से दरयाफ्त फरमाया तो आप स0 ने पूछा कि वहां जाहिलियत के बुतों में से कोई ऐसा बुत था जिसकी इबादत की जाती रही हो। सहाबा रजि0 ने फरमाया नही। फिर आप स0 ने पूछा क्या वहां किसी मुश्रिकीन का मेला लगता था। सहाबा ने अर्ज किया नहीं। तो आप ने फरमाया नज्र पूरी कर लो। याद रखो जो नजर अल्लाह की नाफरमानी की हो उसे पूरा करना दुरूस्त नहीं और इसी तरह जिस नजर को पूरा करना इन्सान की ताकत में नही उसे भी पूरा करना जरूरी नही। (सनन अबूदाउद 3313)
जाहिर है कोई सहाबी अल्लाह ही का नाम लेकर जानवर जिब्ह करता। पर यहां मुकाम (स्थान) का मसला था जो नबी स0 ने जानने के बाद कि यह जगह गैर अल्लाह से पाक है तभी जानवर जिब्ह करने की इजाजत दी।
आगे अल्लाह ने इन सब चीजों को किसी मजबूरी में यानी इतना मजबूर हो जाय कि अगर खाया न जाय तो जान जाने का खुदसा हो जाय लेकिन अंदरूनी तबियत खाने का न हो। फिर भी जान के लिए खाना पड़े तो खा लिया जाय। लेकिन आदत न बनाई जाय। यहां पर अल्लाह ऐसे खाने को हलाल नही कहा है लेकिन माफ कर देने को कहा है।
हदीस- अब्दुल्लाह बिन अब्बास से रिवायत है रसू0 स0 ने कुचली वाले दरिन्दों और पंजों से शिकार करने वाले परिन्दों को खाने से मना फरमाया। (सहीह मुस्लिम ह0 4996)
हदीस- सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 फरमाते है कि रसू0 स0 ने हर उस दरिन्दे के गोस्त को खाने से मना फरमाया जो कुचली (नोकदार दाँत वाले जानवर) वाला हो और हर उस परिन्दे का गोस्त खाने से मना फरमाया जो चंगुल वाला हो यानी जो अपने पंजे से शिकार करता हो। (सहीह मुस्लिम 4994, अबूदाउद 3803)
दरिन्दा - हर वह शिकारी जानवर जिसके दाँत नुकीले होते हैं उन्हें कुचली जानवर कहते हैं। जिसका गोस्त हराम है। जैसे - शेर, चीता, रीछ, हाथी, भेड़िया, कुत्ता, गीदड़, लोमड़ी वगैरह
जैसे- बाज, अकाब, शाहीन, चील, उल्लू, गिद्ध वगैरह
वाजेह रहे कि जो जानवर हराम है उस जानवर का हर चीज हराम है। जैसे- दूध और चर्बी या उससे कोई भी चीज बनाई गई हो।
कुरान- तुम्हारे लिए दरिया का शिकार हलाल हुआ और दरिया का खाना तुम्हारे और सब मुसाफिरों के फायदे के वास्ते। (सू0 मायदा आ0 96)
कुराने करीम में दरिया का शिकार और दरिया का खाना हलाल किया है। मसलन मछली चाहे छोटी हो या बड़ी। लेकिन वह दरिया की ही जिंदगी जीती हो और वह पानी के बगैर जिन्दा न रह पाए और बिना पानी के मर जाये। मसलन किसी मछली को पानी से बाहर कर दिया जाय तो वह मर जायेगी। तो ऐसे दरियाई जीव अल्लाह ने हलाल किया है।
हदीस- जाबिर बिन अब्दुल्ला रजि0 बयान करते हैं कि हम पतों की फौज में शरीक थे। अबूउबैदा रजि0 हमारे अमीर थे। फिर हमें शिद्दत से भूख लगी, आखिर समन्दर ने एक ऐसी मुर्दा मछली बाहर फेंकी कि हमने वैसी मछली पहले कभी नही देखी थी। वह मछली हमने पंद्रह दिन तक खाई। फिर अबूउबैदा रजि0 ने उसकी हड्डी खड़ी करवा दी तो ऊँट का सवार इसके नीचे से गुजर गया।.......हदीस बड़ी है........ वापस लौटकर इसका जिक्र रसू0स0 से किया तो आप स0 ने फरमाया कि वह रोजी खाओ जो अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिए भेजी है। अगर तुम्हारे पास उसमें से कुछ बची हो तो मुझे भी खिलाओ। चुनांचे एक आदमी ने उसका गोस्त लाकर आप की खिदमत में पेश किया और आप ने भी इसे तनाविल फरमाया। (सहीह बुखारी 4362, 5493, 2483, सहीह मुस्लिम 4998, 4999, अबूदाउद 3840)
कुछ जानवर ऐसे भी हैं जो दरिया में भी और दरिया के बाहर भी रहते हैं। जैसे- कछुआ, मेढक, मगरमच्छ और सांप वगैरह। ऐसे जानवर इस आयत के जमरे में नही आते।
कुरान- और उसने जानवर पैदा किये जिनसे गरम लिबास और बहुत से फायदे और इन्हें खाते हो। और तुम्हारे लिए इनमें जीनत है। (सु0 नहल आ0 5, 6) और घोड़े, खच्चर और गधे पैदा किये ताकि तुम इन पर सवार हो और यह तुम्हारे लिए जीनत है। (सु0 नहल आ0 8)
हदीस- सय्यदना जाबिर रजि0 फरमाते है कि रसू0 स0 ने खैबर के दिन घरेलू गधों का गोस्त खाने से मना फरमाया और घोडों का गोस्त खाने की इजाजत दी। (सहीह बुखारी 4219, 5520, सहीह मुस्लिम 5022, तिर्मिज़ी 1793, अबूदाउद 3788, 3808)
हदीस- असमा रजि0 से रिवायत है कि रसू0 स0 के जमाने में घोड़ा जिब्ह किया और उसे खाया। (सहीह बुखारी 5511, 5519, सहीह मुस्लिम 5025, इब्ने माज़ा 3190)
इस रिवायत की बिना पर तकरीबन उल्माये वायमा का इस पर इत्तफाक है कि घोड़े का गोस्त खाना हलाल है पर इमाम अबूहनीफा रह0 से कराहत या हरमत का कौल मन्कूल है लेकिन इन्तकाल से तीन दिन कब्ल अपने इस कौल से रुजू कर लिया था। अब भी फोकहा से इसकी कराहत मन्कूल है क्योंकि अबूदाउद की एक रिवायत में रसू0 स0 से इसकी ममानत भी मन्कूल है कि आपने घोड़े, खच्चर और गधों का गोस्त खाने से मना फरमाया लेकिन मुहद्दिसीन ने इस हदीस को जईफ करार दिया। वाजेह रहे कि हर हलाल चीज खाना जरूरी नहीं पर अगर खाये तो ममानत नहीं।
बुखारी व मुस्लिम की एक हदीस में रसू0 स0 ने घरेलू यानी पालतू गधों का गोस्त हराम करार दिया।
हदीस- सय्यदना अबू कतादह रजि0 ने एक मरतबा जंगली गधा का शिकार किया फिर रसू0 स0 से इसके गोस्त खाने का मसला दर्याफ्त किया तो आप स0 ने फरमाया कि क्या तुम्हारे पास इसके गोस्त में से कुछ मौजूद है। अबूकतादह रजि0 ने कहा हमारे पास उसके पाये मौजूद हैं। चुनांचे आप स0 ने पाये लिए और तनावल फरमाया। ( बुखारी व मुस्लिम)
एक और रिवायत में बिल्ली और खच्चर की ममानत मन्कूल है। और एक रिवायत में ‘‘जलाला’’ का गोस्त (यानी वह जानवर जो गंदगी खाने का आदी हो जाये) खाने और उसका दूध पीने से मना फरमाया। (तिर्मिजी 1824, अबूदाउद 3785)
कुछ ऐसे परिन्दे जो गन्दगी ही खाना उनकी आदत होती है जैसे कौवा और इनकी ही तरह और परिन्दों का गोस्त खाना हराम है। पालतू जानवर या परिन्दे की गंदगी खाने की आदत हो हो ऐसे जानवर को दस दिन और मुर्ग को तीन दिन तक बांधकर रखा जाये और साफ चीजें खिलाई जाये हत्ता कि जिस्म और दूध से बदबू आनी बंद हो जाये तो हलाल होगा।
हदीस- सय्यदना अब्दुल्लाह बिन उमर रजि0 मरवी एक रिवायत में है कि आप स0 से गोह के बारे में सवाल किया गया तो आप स0 ने इरशाद फरमाया मैं न इसे खाता हूं और न मैं इसे हराम करार देता हूं। (बुखारी 5536, मुस्लिम 5027)
हदीस- सय्यदना इब्ने अब्बास रजि0 से मरवी है कि उन्हें सय्यदना खालिद बिन वलीद रजि0 ने बयान किया है कि एक दिन वह रसू0 स0 के हमराह हजरत मैमूना रजि0 के घर गये जो (खालिद रजि0 की) खाला थी और इब्ने अब्बास की भी। वहां इनके पास उन्होंने एक गोह भुनी हुई रखी पाई। हजरत मैमूना रजि0 ने उस गोह को रसू0 स0 के सामने पेश किया लेकिन आप स0 ने उसकी तरफ से अपना हाथ खींच लिया। सय्यदना खालिद रजि0 ने यह देखा तो पूछा कि या रसू0 स0 क्या गोह हराम है? रसू0 स0 ने फरमाया नही बल्कि यह मेरी कौम की जमीन (यानी हजाज) में नही पाई जाती इसलिए मै इससे अपने अन्दर कराहत (घृणा) महसूस करता हूं। सय्यदना खालिद रजि0 कहते हैं कि फिर मैने उस गोह को अपनी तरफ खींच लिया और खाने लगा और रसू0 स0 मेरी तरफ देखते रहे। (सहीह बुखारी 5391, 5400, 5537)
गोह के मामले में सनन अबूदाउद में रसू0 स0 की ममानत भी मौजूद है। इमाम अहमद बिन हम्बल और इमाम मालिक और इमाम शाफई रह0 इसको हलाल और इमाम अबू हनीफा रह0 अबू दाउद की बिना पर इसकी हरमत के कायल हैं। और अहले इल्म के नजदीक इख्तलाफ है। लेकिन मुत्तफिक अलैह हदीस के कायल भी हैं। इमाम तिर्मिजी रह0 के नजदीक कराहत की वजह से एहतियात बेहतर है।
हदीस- रसू0 स0 ने फरमाया चूहा घी में गिर जाये और घी जमा हुआ है तो चूहा और इसके इर्द गिर्द का घी फेंक दो बाकी खाओ और अगर घी पिघला हुआ हो तो इसके करीब न जाओ। (सहीह बुखारी 5538, 5540)
हदीस- सय्यदना अनस रजि0 से रिवायत है कि एक दिन एक मुकाम पर शिकार के लिए एक खरगोश का पीछा किया और पकड़ लिया फिर इसको अबूतलहा के पास लाया। उन्होने इसको जिब्ह किया फिर उसका एक पुट्ठा और दोनों रानें रसू0 स0 के पास भेजीं। आप स0 ने इसको कबूल फरमाया। (सहीह बुखारी 5535, सहीह मुस्लिम 5048, तिर्मिज़ी 1783, अबूदाउद 3791, इब्ने माज़ा 3243)
पीने वाली चीजों में शराब या कोई भी चीज जो खाने से नशा हो जाय हराम है। हदीस में कुछ ऐसी भी चीजों का जिक्र मिलता है जो दो हलाल चीज एक बरतन में (एक साथ खाने पर) नशा करे या नुकसान करे तो उसका खाना ममनूह है।
कुरान- शराब, जुआ, बुत और किस्मत के तीर सब पलीद हैं और शैतानी कामों में से हैं पस इनसे बचो। (सू0 मायदह आ0 90)
हदीस- उम्मुलमोमनीन ह0 आयशा रजि0 फरमाती हैं कि रसू0 स0 ने फरमाया हर नशे वाली चीज हराम है। (सहीह बुखारी 5585, इब्ने माजा 3386)
हदीस- रसू0 स0 ने इरशाद फरमाया अल्लाह सुभानोताला ने शराब, इसके पीने वाले, पिलाने वाले, बेचने वाले, खरीदने वाले, निचोड़ने और निचोड़ने में मदद करने वाले, उठाने वाले, जिसकी तरफ उठाई गई है और इस की कीमत खाने वाले सब पर लानत है। (सनन अबूदाउद 3674, इब्ने माजा 3380)
हदीस- रसू0 स0 का फरमान है। तमाम नशा देने वाली चीजें शराब हैं और हर शराब हराम हैं। (सहीह मुस्लिम 5211)
और दूसरे का खाना बिना उसकी इजाजत के नही खायें हदीस में रसू0 स0 का फरमान है कि बिना इजाजत कोई दूसरे के जानवर का दूध न निकाले। (सहीह बुखारी 2435, सहीह मुस्लिम 4511, सनन अबूदाउद 2623)
अल्लाह हर मुसलमान को सही तराके पर और हलाल खाने-पीने और अमल करने की तौफीक दे। आमीन!
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