बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
नोट - नीचे लिखी हुई सारी अहादीस इन्टरनेशनल हदीस नम्बर के मुताबिक लिखा गया है। तहकीक और इत्मिनान के लिए Google गूगल सर्च में हदीस का नाम और दिया गया हदीस नम्बर लिखकर सर्च करके सारी हदीसों को पढ़ा जा सकता है।
जन्नती फ़िरक़ा कौन ?
आज के दौर में हर फिरका अपने आप को हक पर समझता है और दलायल भी पेश करता है। ताज्जुब की बात तो यह है कि हर फिरका यह मानता हैं नबीस0 का तरीका ही हक है फिर भी अपने आप को तमाम नामों से नामजद करते हैं और उसी पर अमलपैरा भी होते हैं मसलन कोई हनफी, साफई, मालकी, हम्बली है तो कोई कादरिया, चिस्तिया, नक्शबंदिया और कोई देवबन्दी, वहाबी, बरैलबी है। नबी स0 ने सच ही कहा है -
☞ ह0 अबूहुरैरा रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया यहूदी और इसाई 71 या 72 फिरकों में तकसीम हुए और मेरी उम्मत 73 फिरकों में तकसीम होगी। (सनन अबूदाउद 4596, तिर्मिजी 2640, इब्नेमाजा 3991)
☞ ह0 मुआविया बिन अबूसुफियान रजि0 खुत्बा के लिए खड़े हुए और कहाः खबरदार! तहकीक रसू0स0 हममें खड़े हुए और फरमायाः खबरदार! तुमसे पहले अहले किताब 72 फिरकों में तकसीम हुए थे और ये मिल्लत 73 फिरकों में तकसीम होगी। बहत्तर आग में जाएंगे और एक फिरका जन्नत में जायेगा और यही ‘अलजमाअत’ होगा। (सनन अबूदाउद 4597)
➤ इन सब फिरकों में सिर्फ एक ही फिरका जन्नती होगा तो किसे हक पर समझा जाय। सब इस बात को मानते हैं चार मसलक हैं सब कहते हैं चारों मसलक बरहक हैं तो जन्नत में कौन जायेगा? अगर चारों बरहक हैं तो सिर्फ अपने फिरके को तरजीह क्यों देते हैं। नबीस0 का फरमान है एक ही जमात जन्नत में जायेगी। अवाम कहती है चारों मसलक हक पर है तो नबी स0 के फरमान के मुताबिक तो एक ही जमात जन्नत में जायेगी फिर चारो हक पर कैसे हुई। अपना अमल गैरमुस्लिम भी सच और हक समझता हैं लेकिन हक पर नही। नबी स0 का फरमान है -
☞ सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अम्र रजि0 से मरवी है कि रसू0स0 ने फरमाया मेरी उम्मत पर एक वक्त ऐसा आयेगा जैसा बनी इस्राईल पर आया था। जैसे कि एक जूता दूसरे के बराबर होता है, यहां तक कि अगर उनमें से किसी ने एलानिया अपनी मां से जिना किया होगा तो मेरी उम्मत में भी ऐसा करने वाला होगा। और बनीइस्राइल बहत्तर फिरकों में बंटे जब कि मेरी उम्मत तिहत्तर फिरकों में तकसीम होगी, एक जमात के सिवा सभी जहन्नमी हैं। रावी ने अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल! वह कौन हैं? आप स0 ने फरमायाः जिस पर मै और मेरे सहाबा हैं। (तिर्मिजी 2641)
☞ ह0 अबूहुरैरा रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया मेरी सारी उम्मत जन्नत में जायेगी सिवाय उस शख्स के जिसने इन्कार किया। अर्ज किया गया किसने इन्कार किया? आप स0 ने फरमाया जिस शख्स ने मेरी इताअत की वह जन्नत में जायेगा और जिसने मेरी नाफरमानी की गोया उसने इन्कार किया। (सहीह बुखारी 7280, मिश्कात 143)
➤ और जो नबी स0 के तरीके पर तो हो लेकिन हद से ज्यादा बढ़ने वाला हो वह भी नबी स0 का तरीका नाकाबिले कबूल होगा। हदीस मुलाहजि हो -
☞ हजरत अब्दुल्लाह बिन मसूद रजि0 से रिवायत है कि रसू0स0 ने फरमाया ‘‘खबरदार! ग्लू करने वाले, हद से बढ़ने वाले हलाक हुए। आप ने यह बात तीन बार फरमाई। (सनन अबूदाउद 4608)
☞ ह0 अनस रजि0 बयान करते हैं कि तीन शख्स नबीस0 की इबादत के मुताल्लिक पूछने के लिए आप स0 के अजवाज मोतहरात के पास आये जब उन्हें इसके मुताल्लिक बताया गया तो गोया उन्होंने उसे कम महसूस किया। चुनान्चे उन्होंने कहा : हमारी नबी स0 से क्या निस्बत? अल्लाह ने तो उनकी अगली पिछली तमाम खताएं माफ फरमा दी हैं। उनमें से एक ने कहाः मैं तो हमेशा सारी रात नमाज पढ़ूंगा। दूसरे ने कहाः मै दिन के वक्त हमेशा रोजा रखूंगा और इफ्तार नही करूंगा और तीसरे ने कहाः मैं औरतों से अजतनाब करूंगा और मैं कभी शादी नही करूंगा। नबी स0 इनके पास आये और पूछाः तुम वह लोग हो जिन्होने इस तरह कहा है। अल्लाह की कसम! मैं तुमसे ज्यादा अल्लाह से डरता हूं और तुमसे ज्यादा तकवा रखता हूं लेकिन मै रोजा भी रखता हूं और इफ्तार भी करता हूं, रात को नमाज पढ़ता हूं और सोता भी हूं और मैं औरतों से शादी भी करता हूं। पस जो शख्स मेरी सुन्नत से एराज करे वह मुझसे नहीं। (सहीह बुखारी 5063, मिश्कात 145, सहीह मुस्लिम)
☞ नबी स0 ने फरमाया मेरी उम्मत का एक गिरोह हमेशा गालिब रहेगा यहां तक कि कयामत आ जायेगी और वह गालिब ही रहेगें। (सहीह बुखारी 7311)
☞ रसू0स0 ने फरमायाः लोगों सुन रखो कि मै एक इन्सान हूं। करीब है कि अल्लाह का कासिद मेरे पास आयेगा और मैं लब्बैक कहूंगा। मैं तुममें दो अजीम चीजें छोड़ कर जा रहा हूं। इनमें से पहली अल्लाह की किताब है जिसमें हिदायत और नूर है तो अल्लाह की किताब को ले लो और इसे मजबूती से थाम लो! आपने किताबुल्लाह पर बहुत जोर दिया और इसकी तरगीब दिलाई। फिर तीन दफा फरमाया और मेरे अहले बैत। मै अपने अहले बैत के मामले में तुम्हें अल्लाह याद दिलाता हूं। (पूरी हदीस पढ़ें- सहीह मुस्लिम 6225) अगली हदीस में हैं एक अल्लाह की किताब जो अल्लाह की रस्सी है जिसने इसका इत्बाह किया वह सीधी राह पर रहेगा और जो इसे छोड़ देगा वह गुमराही पर होगा। (सहीह मुस्लिम 6228)
☞ ह0 अबूहुरैरा रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया आदमी के झूठा होने के लिए यही काफी है कि वह हर सुनी सुनाई बात (बिना तहकीक) बयान कर दे। (सहीह मुस्लिम 7, 9 उमर रजि0 से रिवायत, 11 ह0 अब्दुल्लाह बिन मसूद रजि0 से रिवायत, मिश्कात 156)
☞ ह0 अबूहुरैरा रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया आखिरी दौर में फरेबकार झूठे लोग होगे वह तुम्हारे पास ऐसी अहादीस लाएंगे जो तुमने सुनी होगी न तुम्हारे आबाय ने। पस अपने आप को उनसे और उन्हें अपने आप से दूर रखो। ताकि वह तुम्हें गुमराही और फितने में मुब्तला न कर दें। (सहीह मुस्लिम 16, मिश्कात 154)
➤ ऊपर की तमाम अहादीस से पता चलता है कि हद से बढ़ने वाले, बिना तहकीक हदीस बयान करने वाले, गैर मुस्लिम के तरीके पर चलने वाले, अपनी मर्जी एख्तियार करने वाले, ग्लू करने वाले, कुरान व हदीस से ज्यादा अपने बनाये हुए तरीके या अपने उल्मा की तरजीह देना ही फिरका परस्ती है। हर तरफ से कट कर सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की किताब को मजबूती से पकड़े रहना और नबी स0 के तरीके पर ही लगे रहना ही कामयाबी है।
➤ अल्लाह से यही दुवा है कि अल्लाह हमें तमाम फिरकों से महफूज रखे और नबी स0 की सुन्नत पर चलने की तौफीक दे। क्योंकि फरमाने इलाही है -
जिन लोगों ने अपने दीन में कई रास्ते निकाले और कई कई फिरके हो गये उनसे तुम को कुछ काम नही। उनका काम खुदा के हवाले फिर जो कुछ वह करते रहे हैं वह इनको सब बताएगा। (सू06अनाम आ0 159)
फिरका से बचने का तरीका!
और यह किताब (क़ुरआन) हमने उतारी है जो बरकत वाली है तो तुम इस पर चलो और डरते रहो ताकि तुम पर रहम की जाय। (सू06अनाम आ0 155)
और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मजबूती से पकड़ो और फूट में न पड़ो। (सू03इमरान आ0 103)
और जिसने तागूत को ठुकरा दिया और अल्लाह पर ईमान लाया उसने मजबूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं। (सू02बकरा आ0 256)
पैरवी करो उसकी जो नाजिल किया गया है तुम्हारी तरफ तुम्हारे रब के पास से। और न पैरबी करो इसके सिवा और औलिया (रफीक) की। कम ही है जो तुम नसीहत कबूल करते हो। (सू07आराफ आ0 3)
ऐ ईमान वालों! अल्लाह और रसूल का हुक्म मानों और उनका जो हुक्मरां हो। फिर अगर तुम्हारे बीच किसी बारे एख्तलाफ हो जाय तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ लौटाओ। अगर अल्लाह और आखिरत पर ईमान रखते हो। यही अच्छा तरीका है फैसले की नजर से। (सू04निसा आ0 59)
☞ हजरत अरबाज बिन सारया रजि0 फरमाते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया कि तुममें से जो जिन्दा रहेगा वह बहुत से इख्तलाफ देखेगा। पस नई बातों से बचते रहना क्योंकि ये गुमराही है। तो तुममें से जो शख्स वह जमाना पाये तो मेरी सुन्नत और मेरे हिदायत याफ्ता खुल्फाये राशदीन रजि0 की सुन्नतों को मजबूती से पकड़ लेना। (तिर्मिजी 2676, इब्ने माजा 43, मसनद अहमद 17272)
यकीनन तुम्हारे लिए रसूले खुदा स0 में उम्दा नमूना मौजूद है। हर उस शख्स के लिए जो अल्लाह की और कयामत के दिन की उम्मीद रखता हो और अल्लाह को खूब याद रखता हो। (सू033अहजाब आ0 21)
जिसने रसूल का हुक्म माना उसने अल्लाह का हुक्म माना। (सु04निसा आ0 80)
ऐ ईमान वालों-अल्लाह और रसूल के हुक्म पर चलो और सुन लेने के बाद उससे मुंह न मोड़ो। (सु08अनफाल आ0 20)
ऐ ईमान वालों! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढ़ो। (सू049हुजुरात आ0 1)
और रसूल जो कुछ तुम्हें दें ले लो और जिस चीज से तुम्हें रोकें उससे रुक जाओ और अल्लाह का डर रखो। (सू059हश्र आ0 7)
