बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
नोट - नीचे लिखी हुई सारी अहादीस इन्टरनेशनल हदीस नम्बर के मुताबिक लिखा गया है। तहकीक और इत्मिनान के लिए Google गूगल सर्च में हदीस का नाम और दिया गया हदीस नम्बर लिखकर सर्च करके सारी हदीसों को पढ़ा जा सकता है।
टख़ने के ऊपर कपड़े रखना
➤ टखने के ऊपर तहबन्द, पाजामा, पैंट वगैरह लटकाना शरीयत में क्या हुकुम है। हदीस मुबारका की रोशनी में समझते हैं। पहले हम यह जानेगे कि टखने के ऊपर कपड़े रखना क्यों जरूरी है। हदीस मुलाहिजा हो -
☞ ह0 अबूहुरैरह रजि0 ने बयान किया कि रसू0स0 ने फरमाया तहबन्द का जो हिस्सा टखनों से नीचे लटका हो वह जहन्नम में होगा। (सहीह बुखारी 5787)
☞ ह0 अबूहुरैरह रजि0 ने बयान किया कि रसू0स0 ने फरमाया जो शख्स गरूर की वजह से तहबन्द घसीटता है तो अल्लाह तआला कयामत के दिन उसकी तरफ नजर भी नही करेगा। (सहीह बुखारी 5788)
☞ ह0 अब्दुल्लाह बिन उमर रजि0 से मरवी है कि रसू0स0 ने फरमाया कि अल्लाह तआला उसकी तरफ कयामत के दिन नजरे रहमत नही करेगा जो अपना कपड़ा तकब्बर व गरूर के सबब से जमीन पर घसीट कर चलता है। (सहीह बुखारी 5783, सहीह मुस्लिम 5455)
☞ रसू0स0 ने फरमाया ने एक शख्स गरूर में अपना तहबन्द घसीटता हुआ चल रहा था कि उसे जमीन में धंसा दिया गया और वह उसी तरह कयामत तक जमीन में धंसता ही रहेगा। (सहीह बुखारी 5790, सहीह मुस्लिम 5465, 5467)
☞ रसू0स0 ने फरमाया अल्लाह कयामत के रोज तीन किस्म के लोगों से न बात करेगा और न इनकी तरफ देखेगा और न उन्हें गुनाहों से पाक करेगा और इनके लिए दर्दनाक अजाब होगा। एक अपना कपड़ा नीचे लटकाने वाला, दूसरा एहसान जताने वाला और तीसरा झूठी कसम से अपने सामान की मांग बढ़ाने वाला। (सहीह मुस्लिम 293, सनन अबूदाउद 4087)
➤ ऊपर की हदीसों से यह पता चल गया कि तहबन्द पाजामा पैंट वगैरह अगर टखनें के नीचे लटकाते हुए चलेगे तो उसके क्या गुनाह हैं। ये तो आम हालत में भी टखनें के नीचे अजार लटकाना मना है। इसी तरह नमाज में भी यह शर्त लागू होती है। हदीस मुलाहिजा हो -
☞ ह0 अबूहुरैरा रजि0 बयान करते हैं कि एक दफा एक आदमी नमाज पढ़ रहा था और वह अपना तहबन्द टखनों से नीचे लटकाए हुए था। रसू0स0 ने उससे फरमाया जाओ और वजू करके आओ। चुनान्चे वह गया और वजू करके आया। आप स0 ने उसे दोबारा फरमाया जाओ और वजू करके आओ। चुनान्चे वह गया और वजू करके आया। तो एक आदमी ने आप से कहाः ऐ अल्लाह के रसूल स0! किस वजह से आपने इसे वजू करने का हुक्म दिया। आप स0 ने फरमाया यह शख्स अपना तहबन्द लटकाकर नमाज पढ़ रहा था और अल्लाह तआला ऐसे बन्दे की नमाज कबूल नही करता जो अपना तहबन्द लटका कर नमाज पढ़ रहा हो। (सनन अबूदाउद 638, 4086 मिश्कात 761)
➤ हमारे मुल्क में अक्सर लोग यह भी मसला उठाते हैं कि आखिर लुंगी, पाजामा कितनी ऊपर होनी चाहिए। सब एक दूसरे पर इल्जाम लगाते रहते हैं। यहां तक कि लोग मजाक उड़ाने में भी कोई कसर नही छोड़ते। इस तरह की हरकात करने वाले यह हदीस जरूर पढ़ें -
☞ ह0 इब्ने उमर रजि0 से रिवायत की, कहा मै रसू0स0 के करीब से गुजरा, मेरी कमर की चादर किसी हद तक लटक रही थी तो आप स0 ने फरमाया अब्दुल्लाह! अपनी चादर ऊपर कर लो। मैने अपनी चादर ऊपर कर ली, आप स0 ने फरमाया और ज्यादा कर लो, मैने और ज्यादा ऊपर की। फिर मैं इसको ऊपर करता रहा हत्ता कि बाज लोगों ने अर्ज की कहां तक करें? आप स0 ने फरमाया पिंडुलियों के आधे हिस्सों तक। (सहीह मुस्लिम 5462 मिश्कात 4368)
☞ नबी स0 के सहाबी इब्ने हन्जलिया रजि0 बयान करते हैं कि नबी स0 ने फरमाया खरीम अच्छा आदमी है अगर उसके बाल लम्बे न होते और न वह तहबन्द लटकाता। खरीम को यह बात पहुची तो उसने उस्तरा लिया और लम्बे बालों को अपने कानों तक काट लिया और अपना तहबन्द अपनी आधी पिंडुली तक उठा लिया। (सनन अबूदाउद 4089 मिश्कात 4461)
☞ हदीस के चन्द कलमात- रसू0स0 ने फरमाया अपना अजार नुस्फ पिण्डली तक रख अगर तू ऐसा न करे तो फिर टखनों तक और अजार टखनों के नीचे लटकाने से अजतनाब कर क्योंकि यह तकब्बुर है और अल्लाह तकब्बुर पसन्द नही करता। (अबूदाउद 4084, मिश्कात 1918)
➤ ऊपर की हदीस से यह भी साबित हो गया कि टखने के नीचे कपड़ा लटकाना ही तकब्बुर है। चाहे इरादा हो या न हो। कुछ लोग इस मामले में एक हदीस भी पेश करते हैं और कहते हैं अगर तकब्बुर का इरादा नही तो कोई हर्ज नही। वह हदीस ये है -
☞ ह0 सालिम बिन अब्दुल्लाह रजि0 के वालिद से मरवी है कि रसू0स0 ने फरमाया जो शख्स तकब्बर की वजह से तहबन्द घसीटता हुआ चलेगा तो अल्लाह पाक इसकी तरफ कयामत के दिन उसकी तरफ नजर भी नही करेगा। ह0 अबूबकर रजि0 ने अर्ज किया या रसू0स0! मेरे तहबन्द का एक हिस्सा कभी लटक जाता है मगर ये कि खाशतौर से इसका ख्याल रखा करूं? आप स0 ने फरमाया तुम उन लोगों मे से नही हो जो ऐसा तकब्बर से करते हैं। (सहीह बुखारी 5784, 6062, 3665 सनन अबूदाउद 4085 मिश्कात 4369)
➤ इस हदीस में ह0 अबूबकर रजि0 ने ये कहा है कि मेरा तहबन्द खुदबखुद नीचे सरक जाता है न कि वो जानबूझकर करते थे। यानी टखने के ऊपर ही हमेशा कपड़ा रखते थे लेकिन किसी किसी वक्त सरक जाता था तो उसके लिए नबी स0 से सवाल किया तो नबी स0 ने कहा कि ये तुम तकब्बुर से नही करते। ये नही कहा कि लटका कर ही रखो। नबी स0 किसी सहाबी को जब कपड़ा टखने के नीचे लटकता देखते (हदीस ऊपर गुजर चुकी है) तो फौरन अजार ऊपर करने को कहते जबकि उनके अन्दर तकब्बुर की बात न थी। ह0 उमर रजि0 ने तो इसको तकवा का बाअस भी कहा है। नीचे हदीस पेश है -
☞ ह0 उमर रजि0 जब जख्मी हालत में मौत से जूझ रहे थे तब एक नौजवान अयादत करके वापस जा रहा था तो उसे वापस बुलाया और फरमाया यह अपना कपड़ा ऊपर उठाये रखो कि इससे तुम्हारा कपड़ा भी ज्यादा दिनों तक चलेगा तुम्हारे रब से तकवा का भी बाअस है। (सहीह बुखारी 3700)
➤ ऊपर की हदीसों से साफ मालूम होता हैं कि चाहे तकब्बुर हो या न हो हमें अजार टखनें के ऊपर ही रखने चाहिए। अक्सर देखा जाता है लोग सिर्फ नमाज में ही अजार टखने के ऊपर करते हैं। जबकि ये हुक्म हर वक्त के लिए है। कुछ लोग पाजामा या पैंट मोड़ लेते हैं तो ऐसा करना बेहतर नहीं क्योंकि नमाज में बाल और कपड़े समेटना मना है हदीस ये है -
☞ रसू0स0 ने फरमाया मुझे सात हड्डियों पर सज्दे का हुक्म हुआ है कि न बाल समेटूं और न कपड़े। (सहीह बुखारी 816, सहीह मुस्लिम 1095)
➤ लेकिन नमाज भी बचाना जरूरी है इसलिए ऐसा करते हैं। इसलिए पहले नमाज ही बचाई जाय और पाजामा या पैंट उसी नाप में सिलवाएं कि टखने के नीचे न जाये। और हर सुन्नत और वाजिब पर अमल हो जाय। बाकी हर गलती को माफ करने वाला अल्लाह है।
गलतफहमी -
➤ कुछ मुसलमान भाई इस मसले को टखना खुला रखने और टखना बन्द रखने का मसला समझते हैं। जबकि ये मसला कमर से नीचे पहने हुए कपड़े का है। टखना तो सिर्फ उसकी हद है। इसीलिए टखने का नाम बार बार आना लाजमी है। अगर जूता और मोजा पहन रखा हो तो भी यह पाबन्दी आयद होगी क्योंकि टखने के नीचे अजार लटकना ही तो तकब्बुर है न कि टखना ढकना।
