बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
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➤ मुश्रिकीन मक्का के लोगों का ईमान गैरुल्लाह के लिए क्या था। जिसकी मुश्रिक इबादत करते थे और उन्हें पुकारते थे वे कौन थे। उनको किस वजह से इबादत करते और पुकारते थे। क्या मुश्रिकीन अल्लाह पर ईमान रखते थे। इस मौजू पर कुरान और सहीह अहादीस की रोशनी में समझेगे और गौर करेगें कि कहीं हमारे मुस्लिम आवाम में भी इस तरह का अकीदा रायज तो नही।
मुश्रिकीन के गैरुल्लाह कौन थे?
अल्लाह का फरमान है-
1- तुम लोग अल्लाह के सिवा जिन्हें पुकारते हो वे तो तुम्हारे ही जैसे बन्दे हैं। (सू07आराफ आ0 194)
2- जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं वे किसी चीज को भी पैदा नही करते बल्कि वे खुद पैदा किये जाते हैं। मुर्दे हैं न कि जिन्दा। उन्हें कुछ मालूम नही कि वे कब उठाये जायेगे। (सु016नहल आ0 20, 21)
3- जिनको ये पुकारते हैं वे तो खुद अपने रब की तरफ (वसीला) पहुचने की चाह रखते है। उनमें जो सबसे ज्यादा करीब है। वह भी इसी उम्मीद में हैं और वे उसकी रहम की उम्मीद रखते हैं और अल्लाह के अजाब से डरते हैं। (सु017बनीइसराइल आ0 57)
4- और न वह तुम्हें हुक्म देगा कि तुम फरिश्तों और नबियों को परवरदिगार ठहराओ, क्या वह तुम्हें हुक्म देगा कुफ्र का? इसके बाद कि तुम मुसलमान हो चुके हो। (सु03 इमरान आ0 80)
5- वह अल्लाह के सिवा पुकारते हैं औरतें (देवियों)। जबकि शरकश शैतान को पुकारते हैं। (सु04 निसा आ0 117)
6- उन्होने बना लिया अपने उल्मा और अपने दर्वेशों (साधू सन्त) को रब अल्लाह के सिवा, और मसीह इब्ने मरयम को भी। (सु09 तौबा आ0 31)
☞ सय्यदना अदी बिन हातिम रजि0 बयान करते हैं कि नबी स0 की खिदमत में हाजिर हुआ, मेरे गले में सोने की सलीब थी, तो आप स0 ने फरमाया, ऐ अदी अपने ऊपर से इस बुत को उतार दो और मैने आप स0 को सुना आप पढ़ रहे थेः ‘‘उन्होने अल्लाह को छोड़कर अपने उलमा और दुर्वेशों को रब बना लिया।’’(सु09 तौबा आ0 31) आप ने फरमाया ‘‘यह उनकी इबादत नही करते थे बल्कि जब वह उनके लिए कोई चीज हलाल कहते तो उसे हलाल समझते और जब उन पर कोई चीज हराम कर देते तो वह उसे हराम समझते। (तिर्मिजी 3095)
☞ हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 से रिवायत - अल्लाह का फरमान- और कहा- कभी भी अपने इलाहों (देवताओं) को न छोड़ना और न ‘वद्द‘ को छोड़ना और न ‘सुवाअ‘ को और न ‘यगूस‘ और न ‘यऊक‘ और ‘नस्र‘ को। (सू071नूह आ0 23) के बारे में मरवी है कि यह सब कौम नूह अलै0 के नेक व सालेह लोग थे। जब वह मर गये तो शैतान ने इनकी कौम को समझाया कि यह नेक लोग जहां बैठा करते थे वहां बतौर यादगार पत्थर नुस्ब कर दो और इन पत्थरों को इनके नामों से मोसूम करो। चुनान्चे उन्होंने ऐसा ही किया लेकिन उस दौर में इन पत्थरों को पूजा न गया जब यह लोग मर गये और बाद वालों पर जहालत छा गई इल्म जाता रहा और असल बात भूल गये तो उन्होने इन यादगारों की परस्तिस शुरू कर दी। (सहीह बुखारी 4920)
☞ हजरत आयशा रजि0 कहती हैं कि एक बार उम्मे हबीबा रजि0 और उम्मे सलमा रजि0 ने हुजूर स0 से एक गिरजा का जिक्र किया जिसमें तस्वीर थी जिसे हब्शा में दोनों ने देखा था। आप स0 ने फर्माया उन लोगों में जब कोई नेक आदमी मर जाता था तो उसकी कब्र पर मस्जिद बना लेते थे और यह तस्वीर बनाते थे। कयामत के दिन ये लोग खुदा के नजदीक सारी मख्लूक से ज्यादा बुरे होगे। (सहीह बुखारी 427, 434, 1341, 3873, मुस्लिम 1181)
अल्लाह कुरान में फरमाता है - क्या तुमने लात और उज्जा को देखा और मनात तेरे पिछलों को। (सू053नजम आ0 19, 20)
☞ हजरत इब्ने अब्बास रजि0 से रिवायत है कि लात एक शख्स था जो हाजियों की मेहमानी किया करता था और सत्तू घोलकर खिलाया करता था। जब वह मर गया तो जिस पत्थर पर वह बैठा करता था उसको बुत की सूरत बनाकर लोग पूजने लगे। उस बुत का नाम लात रखा। (सहीह बुखारी 4849)
मुश्रिक गैर अल्लाह को क्यों पुकारता और पूजता है?
अल्लाह फरमाता है -
1- जब उनसे कहा जाता है कि उनकी तरफ आओ जो अल्लाह ने उतारी है और रसूल की तरफ, तो वे कहते हैं हमारे लिए वही काफी है जिस पर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या अगर उनके बुजुर्ग कुछ भी न जानते हो और न सही रास्ते पर हो तब भी। (सु05माइदह आ0 104)
2- और जब उनसे कहा जाता है कि उस पर चलो जो अल्लाह ने उतारा है तो कहते हैं नही बल्कि हम तो उस पर चलेगें जिस पर हमने अपने बाप दादा को पाया है। (सू031लुकमान आ0 21)
3- ये लोग अल्ला के सिवा ऐसी चीज की इबादत करते हैं जो इन्हें न नुकसान पहुंचा सकते हैं न फायदा और कहते हैं ये अल्लाह के यहां हमारे सिफारिशी हैं। (सु010यूनुश आ0 18)
4- इन्होंने अल्ला के सिवा दूसरे माबूद बना रखा है ताकि वे इनकी ताकत हों। बिल्कुल नही वे इनकी इबादत का इन्कार करेगे और उल्टे इन्ही के खिलाफ हो जायेगे। (सू019मरयम आ0 81, 82)
5- जो अल्ला के सिवा दूसरे मददगार बना रखे हैं वो कहते है हम तो उनकी बन्दगी सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि वे हमें अल्लाह के ज्यादा से ज्यादा करीब कर दें। (सू039जुमर आ0 3)
मुश्रिकीन अल्लाह को मानते थे।
अल्लाह फरमाता है -
1- कह दो कि वह कौन है जो तुमको आसमान और जमीन से रोजी देता है या वह कौन है जो कानों और आंखों का मालिक है। जो जिन्दे को मुर्दे से और मुर्दे को जिन्दे से निकालता है तो वह बोलेगे अल्लाह। (सू010 यूनुश आ0 31)
2- इनसे पूछो तो सही कि जमीन और उसकी सारी चीजें किस की है? बताओ अगर जानते हो। फौरन जवाब देगे कि अल्लाह की। फिर नसीहत क्यों नही हासिल करते? पूछो सातों आसमानों और अर्शे अजीम का रब कौन है? बोलेगे अल्लाह ही है। फिर तुम क्यों नही डरते? पूछो तमाम चाजों का अख्तियार किस के हाथ में है जो पनाह देता है। और जिस के मुकाबले में कोई पनाह नही दिया जाता। अगर जानते हो तो बतला दो? वही जवाब देगे कि अल्लाह ही है। इनसे कहो कि फिर तुम पर किधर से जादू कर दिया जाता है? (सू023 मोमिनून आ0 84 से 89 तक)
3- अगर इनसे पूछो कि किसने जमीन आसमान बनाया? और सूरज और चाँद को काम में लगाया? तो वह जरूर कहेगे अल्लाह। फिर वह कहां उलटे फिरे जाते हैं। (सू029 अनकबूत आ0 61)
4- अगर पूछो किसने आसमान से पानी उतारा (बरसाया)? फिर उससे जमीन को उस के मरने के बाद जिन्दा कर दिया। वह कहेगे अल्लाह। (सू029 अनकबूत आ0 63)
5- जब कश्ती में सवार होते हैं तो खालिश अल्लाह ही को पुकारते हैं फिर जब बचकर खुश्की पर आ जाते हैं तो शिर्क करने लगते हैं। (सू029 अनकबूत आ0 65)
6- उनसे पूछो कि उन्हें (यानी तुमको) किसने पैदा किया? तो वह जरूर कहेगे अल्लाह ने। तो वह किधर उल्टे फिरे जाते हैं? (सू043 जुखरूफ आ0 87)
➤ ऊपर दिये गये कुरान और हदीस के जरिए यह मालूम हुआ कि मुश्रिकीन जिनको पूजते और पुकारते थे वह अल्लाह के नेक बन्दे थे। जिनके बुत बनाए वह भी और बुत के अलावा जिनको पुकारा वह भी गैरुल्लाह ही कहलाए। मुश्रिकीने अरब अल्लाह पर ईमान रखते थे लेकिन हाजत के लिए अपने बनाए हुए माबूद को ही पुकारते थे और इसलिए पुकारते थे कि उनके बाप दादा ने पुकारा था। मुश्रिकीन अपने माबूदों को अल्लाह का सिफारिशी समझते थे और कहते थे यह हमारी ताकत हैं और यह हमें अल्लाह के ज्यादा से ज्यादा करीब कर देगे। मुश्रिकीन के इस अकीदे को अल्लाह तआला ने शिर्क करार दिया। और जो भी इस अकीदे पर मरा वह मुश्रिक और जहन्नमी करार पाया।
➤ अल्लाह हम सब लोगों को ऐसे अकीदे से दूर रखे और सही रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन!
आपका भाई - इकबाल अहमद
मोबाइल नं0- 9935873527
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