बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
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हर मुसलमान मोमिन पर जैसे कुछ रुकुन फर्ज और वाजिब है उसी तरह मोहब्बते अहलेबैत भी हर मुसलमान पर फर्ज और वाजिब है। अल्लाह तआला ने खुद अहलेबैत को कुरान में सू0 नं0 33 अहजाब के आ0 नं0 33 में पाक व साफ करने की इज्जत बख्शी। इसी तरह कुरान में सू0 नं0 42 शूरा का आ0 नं0 23 भी अहलेबैत से मोहब्बत के मुताल्लिक कलाम है। अब हम यह जानेगें सहीह अहादीस की रोशनी में कि अहलेबैत कौन हैं।
अहलेबैत कौन ?
☞ हजरत आयशा रजि0 बयान करती हैं कि नबी स0 सुबह को निकले। आप स्याह बालों की चादर ओढ़े हुए थे। जिस पर पालान (कजाऊँ) की तश्वीर या नक्शा था। तो ह0 हसन रजि0 गये। आपने उनको चादर में दाखिल कर लिया। फिर हजरत हुसैन रजि0 आ गये। वो भी उनके साथ दाखिल हो गये। फिर ह0 फातिमा रजि0 आ गई तो आपने उन्हें भी दाखिल कर लिया। फिर ह0 अली आ गये तो आपने उन्हें भी दाखिल कर लिया। फिर फरमाया- सिवाय इसके नहीं, अल्लाह चाहता है कि तुमसे गन्दगी को दूर कर दे। ऐ अहलेबैत! और तुम्हें खूब पाक-साफ कर दे। (सहीह मुस्लिम 6261)
☞ नबी के घर में परवरिश पाने वाले उमर बिन अबी सलमा बयान करते हैं कि (कुरान तर्जुमा- अल्लाह तो यही चाहता है कि नबी के घर वालों! तुमसे नापाकी को ले जाये और खूब पाक कर दे। ‘सू0 अहजाब आ0 33) यानी अल्लाह नबी के घर वालों से नापाकी को दूर करना चाहता है। ये आयत उम्मे सलमा रजि0 के घर नबी स0 पर नाजिल हुई थी। चुनान्चे नबी स0 ने फातिमा, हसन और हुसैन रजि0 को बुलाकर उन्हें एक चादर में छिपाया और अली रजि0 आप के पीछे थे उन्हें भी चादर में छिपाया और फरमाया, ‘‘ऐ अल्लाह! यह मेरे अहले बैत (घरवाले) हैं तू इनकी नापाकी को दूर कर दे और इन्हें खूब पाक कर दे।’’ उम्मे सलमा कहने लगीः ऐ अल्लाह के रसूल स0 मैं भी इनमें शामिल हूं? फरमाया, ‘‘तुम अपने मुकाम पर हो और भलाई पर हो। (तिर्मिजी 3787, 3205, तबरानी 8216)
☞ सलमा रजि0 से रिवायत है कि नबी स0 ने हसन, हुसैन, अली और फातिमा के ऊपर एक चादर डालकर कहा- ऐ अल्लाह! यह मेरे अहले बैत हैं और मेरे खास लोग हैं तू इनसे निजासत दूर करके इन्हें खूब पाक कर दे। (तिर्मिजी 3871)
☞ हदीस- रसू0स0 ने हजरत अली, फातिमा, हसन और हुसैन रजि0 को बुलाया और फरमाया, ऐ अल्लाह! ये लोग मेरे अहल हैं। (सहीह मुस्लिम 6220, )
अहलेबैत के फजाइल
☞ ह0 जैद बिन अरकम रजि0 बयान करते है कि रसू0स0 एक दिन खुम्मं नामी चश्में पर हमें खिताब करने के लिए खड़े हुए। जो मक्का और मदीना के दर्मियान है तो आपने अल्लाह की हम्द व सना बयान की और वाज और नसीहत फरमाई। फिर फरमायाः ऐ लोगों सुन रखो कि मै एक इन्सान हूं। करीब है कि अल्लाह का कासिद (मौत का फरिस्ता) मेरे पास आयेगा और मैं लब्बैक कहूँगा। मैं तुम में दो अज़ीम चीजें छोड़ कर जा रहा हूं। इनमें से पहली अल्लाह की किताब है जिसमें हिदायत और नूर है तो अल्लाह की किताब को ले लो और इसे मजबूती से थाम लो! आपने किताबुल्लाह पर बहुत जोर दिया और इसकी तरगीब दिलाई। फिर तीन दफा फरमाया और मेरे अहलेबैत। मै अपने अहले बैत के मामले में तुम्हें अल्लाह याद दिलाता हूं। मै अपने अहले बैत के मामले में तुम्हें अल्लाह याद दिलाता हूं। मै अपने अहले बैत के मामले में तुम्हें अल्लाह याद दिलाता हूं। (पूरी हदीस पढ़ें- सहीह मुस्लिम 6225)
☞ ह0 जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजि0 बयान करते हैं कि मैने रसू0 स0 को हज में अरफा के दिन देखा, आप स0 को फरमाते हुए सुना ‘‘ऐ लोगों! मैने तुममें ऐसी चीज छोड़ी है जिसे तुम थाम लोगे तो हरगिज गुमराह नही होगे। अल्लाह की किताब और मेरे अहले बैत।’’ (तिर्मिजी 3786)
☞ ह0 अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 फरमाते हैं रसू0 स0 ने फरमाया क्योंकि अल्लाह तुम्हें नेमतें अता फरमाता है, इसलिए उससे मोहब्बत करो और अल्लाह की मोहब्बत के लिए मुझसे मोहब्बत करो और मेरी मोहब्बत के लिए मेरे अहले बैत से मोहब्बत करो। (तिर्मिजी 3789, हाकिम 4716)
☞ ह0 अबूसईद खुदरी रजि0 फरमाते हैं रसू0 स0 ने इरशाद फरमायाः उस जात की कसम! जो शख्स मेरे अहले बैत से बुग्ज रखेगा अल्लाह उसे दोजख में डालेगा। (हाकिम 4717)
☞ ह0 अबूजर रजि0 एक दफा काबातुल्लाह का दरवाजा पकड़कर बोले : जो मुझे जानता हैं वह तो जानता ही है और जो नही जानता वह भी जान ले कि मै अबूजर हूं। मैने रसू0स0 को फरमाते हुए सुना है कि तुममें मेरे अहले बैत की मिशाल वही है जो नूह अलैहिस्सलाम की कौम में उनकी कस्ती की थी कि जो उसमें सवार हो गया वह बच गया और जो रह गया वह गर्क हो गया। (हाकिम 4720)
☞ ह0 अब्दुल्लाह बिन उमर रजि0 बयान करते हैं कि हजरत अबूबकर रजि0 ने फरमाया मुहम्मद स0 के कुर्ब को आप स0 के अहले बैत में (मोहब्बत व खिदमत के जरिए) तलाश करो। (सहीह बुखारी 3751)
☞ ह0 अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ने इरशाद फरमायाः ऐ अब्दुलमुत्तलिब की औलाद! मैने तुम्हारे लिए अल्लाह तआला से 3 दुआएं मांगी है कि तुम्हें साबिते कदम रखे और तुममें से भटकते हुए को हिदायत बख्शे और तुममें से जाहिलों को इल्म अता फरमाए और मैने अल्लाह तआला से ये भी दुवा मागी है कि वो तुम्हें सखावत वाला बहादुर और रहमदिल बनाए। याद रखो अगर कोई शख्स हजरे अस्वद और मकामें इब्राहीम के दर्मियान जमकर नमाज पढ़ता और रोजे रखता रहे फिर भी मुहम्मद स0 के अहलेबैत से बुग्ज रखने की हालत में फौत हो जाय तो जरूर आग में जायेगा। (हाकिम 4712)
☞ आयशा रजि0 का बयान हैं कि रसू0स0 ने इरशाद फरमाया- 6 किस्म के लोगों पर अल्लाह तआला और उसके हर नबी अलै0 ने लानत की है। पहला- अल्लाह तआला की किताब में इजाफा करने वाला। दूसरा- अल्लाह की तकदीर को झुठलाने वाला। तीसरा- ताकत के बलबूते पर मुसल्लत होने वाला ताकि वह किसी ऐसे शख्स को मुअज्जिज बनाये जिसको अल्लाह ने जलील किया हो और अल्लाह ने जिसे मुअज्जिज बनाया हो उसे जलील करे। चौथा- अल्लाह तआला के हरम की बेहुरमती करने वाला। पांचवा- मेरे अहलेबैत की बेहुरमती करने वाला। छठा- मेरी सुन्नत को तर्क कर देने वाला। (तिर्मिजी 2154, तबरानी 2814)
☞ जैद बिन अरकम रजि0 फरमाते हैं कि रसू0स0 ने इरशाद फरमायाः मै तुममें दो चीजें छोड़कर जा रहा हूं। एक- अल्लाह की किताब। दूसरी- अपने अहलेबैत और यह दोनों एक दूसरे से जुदा नही होगे हत्ता कि ये मेरे पास हौज पर आयेगे। (हाकिम 4711)
अल्लाह हम सब को अहलेबैत से मोहब्बत करने और उनके तरीके पर चलने की तौफीक दे और उनकी बेहुरमती करने से बचाए। आमीन!
