बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
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हजरत हसन व हुसैन रजि0 के फ़ज़ाइल
☞ हजरत हसन रजि0 की पैदाइश माहे रमज़ान 3 हिजरी में हुई और वफात 50 हिजरी में हुई। हज़रत हुसैन रजि0 की विलादत शाबान 4 हिजरी में हुई और शहादत 61 हिजरी में हुई। (सहीह बुखारी)
☞ ह0 उबैदुल्लाह इब्ने अबी राफेय अपने वालिद का यह बयान नकल करते हैं कि मैने देखा कि जब ह0 फातिमा रजि0 के यहां ह0 हुसैन रजि0 की विलादत हुई तो रसू0स0 ने खूद उनके कान में अजान दी। (हाकिम 4827, तबरानी 921, 926)
☞ नबी करीम स0 मिम्बर पर तशरीफ फर्मा थे और हजरत हसन रजि0 आप स0 के पहलू में थे। आप स0 कभी लोगों की तरफ मुतवज्जो होते और फिर हसन रजि0 की तरफ और फर्माते- मेरा ये बेटा सरदार है और उम्मीद है कि अल्लाह तआला उसके जरिए मुसलमानों की दो जमातों में सुलह कराएगा। (सहीह बुखारी 3746, तिर्मिजी 3773, अबूदाउद 4662)
☞ ह0 अबूहुरैरह रजि0 से रिवायत है नबी स0 ने हजरत हसन रजि0 के बारे में फरमाया ऐ अल्लाह! मै इससे मोहब्बत करता हूं तू इससे और इससे मोहब्बत करने वालों से मोहब्बत फरमा। (सहीह मुस्लिम 6256)
☞ उसामा बिन जैद रजि0 बयान करते हैं कि नबी स0 उन्हें और हसन रजि0 को पकड़कर ये दुवा करते थे कि ऐ अल्लाह! मुझे इनसे मुहब्बत है तु भी इनसे मुहब्बत रख। (सहीह बुखारी 3747, इब्ने माजा 142, तबरानी 355)
☞ ह0 बरा रजि0 कहते हैं कि मैने रसू0 को देखा कि ह0 हसन रजि0 आपके कांधे मुबारक पर थे और आप फर्मा रहे थे कि ऐ अल्लाह! मुझे इससे मुहब्बत हैं तू भी इससे मुहब्बत रख। (सहीह बुखारी 3749, सहीह मुस्लिम 6258)
☞ ह0 बराअ रजि0 से रिवायत है कि रसू0 स0 ने हसन व हुसैन रजि0 को देखकर दुवा की ‘‘ऐ अल्लाह! मैं इन दोनों से मोहब्बत करता हूं सो तू भी इनसे मोहब्बत फरमा। (सहीह मुस्लिम 6259, तिर्मिजी 3782)
☞ अल्लाह के रसूल स0 ने फरमाया- हुसैन मुझसे हैं और मै हुसैन से हूं। जो हुसैन से मोहब्बत करेगा अल्लाह भी उससे मोहब्बत करेगा। हुसैन नवासों में से एक नवासा है। (तिर्मिजी 3775, इब्ने माजा 144)
☞ ह0 उक्बा बिन हारिश बयान करते हैं कि मैने ह0 देखा कि ह0 अबूबक्र रजि0 असर की नमाज से फारिग होकर मस्जिद से बाहर निकले तो देखा ह0 हसन रजि0 बच्चों के साथ खेल रहे हैं। ह0 अबूबक्र रजि0 ने उनको अपने कंधे पर उठा लिया और फरमाया, मेरे मां बाप इन पर कुर्बान हो। ये नबी करीम से मुशाबेह हैं, अली से नही और ह0 अली रजि0 वहीं मुस्कुरा रहे थे। (सहीह बुखारी 3542, 3750)
☞ ह0 अबूहुजैफा रजि0 ने बयान किया कि नबी स0 को मैने देखा था। ह0 हसन रजि0 में आपकी पूरी मुशाबिहत मौजूद थी। (सहीह बुखारी 3543)
☞ ह0 अनस रजि0 ने बयान किया कि ह0 हसन बिन अली रजि0 से ज्यादा और कोई शख्स नबी स0 से ज्यादा मुशाबेह नही था। (सहीह बुखारी 3752)
☞ हजरत अली रजि0 बयान करते हैं कि हसन सीने से सर तक रसू0स0 के मुशाबेह थे और हुसैन उससे नीचे रसू0स0 के मुशाबेह थे। (तिर्मिजी 3779)
☞ रसू0स0 खुत्बा दे रहे थे कि ह0 हसन और ह0 हुसैन रजि0 सुर्ख कपडे पहने हुए और गिरते उठते आये तो आप स0 मिम्बर से उतरे फिर उनको पकड़ा और उन दोनों को लेकर मिम्बर पर तशरीफ लाये फिर फरमाया- सच फरमाया अल्लाह जलजलाल ने ‘बिलाशुबा तुम्हारे अमवाल और तुम्हारी औलाद आजमाइश है।’ मैने इन दोनों को देखा तो सब्र न कर सका। इसके बाद आपने फिर खुत्बा देना शुरू कर दिया। (तिर्मिजी 3774, अबूदाउद 1109, सनन निसाई 1414, इब्ने माजा 3600)
☞ ह0 अबूहुरैरह से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल स0 ने फरमाया- जिसने हसन और हुसैन रजि0 से मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने इनसे बुग्ज रखा उसने मुझसे बुग्ज रखा। (इब्ने माजा 143)
☞ रसू0 स0 ने हजरत अली, फातिमा, हसन और हुसैन रजि0 से फरमाया जिससे तुम सुलह करो मेरी भी उससे सुलह है और जिससे तुम जंग करो उससे मेरी भी जंग है।(तिर्मिजी 3870, इब्ने माजा 145, जईफ हदीस)
☞ ह0 अली रजि0 से रिवायत है कि रसू0स0 ने हसन और हुसैन रजि0 का हाथ पकड़कर फरमाया ‘जिसने मुझसे, इन दोनों से, इनके बाप और इनकी मां से मोहब्बत की तो वह कयामत के दिन मेरे साथ मेरे ही मुकाम में होगा। (तिर्मिजी 3733 यह हदीस जईफ है)
☞ ह0 फातिमा जन्नती औरतों की सरदार होगी और हसन व हुसैन जन्नती नौजवानों के सरदार होगे। (तिर्मिजी 3781)
☞ अबूसईद खुदरी रजि0 रिवायत करते हैं कि रसू0स0 ने फरमाया, हसन और हुसैन रजि0 जन्नती जवानों के सरदार हैं। (तिर्मिजी 3768, हाकिम 4779)
☞ अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 बयान करते हैं कि रसू0स0 ह0 हसन को अपने कंधे पर उठाये हुए थे कि एक आदमी ने कहाः ऐ लड़के तुमने बहुत अच्छी सवारी पाइ है तो नबी स0 ने फरमाया यह सवार भी तो अच्छा है। (तिर्मिजी 3784, हाकिम 4794)
☞ ह0 शद्दाद रजि0 बयान करते हैं कि मगरिब या इशा की नमाज के लिए रसू0स0 तशरीफ लाये तो आपने हजरत हसन या हुसैन रजि0 को उठा रखा था। रसू0 आगे बढ़े और बच्चे को नीचे बिठा दिया। फिर नमाज के लिए तकबीरे तहरीमा कही और नमाज शुरू कर दी। नमाज के दौरान में आपने एक सज्दा बहुत लम्बा कर दिया। मैने सर उठाकर देखा तो बच्चा रसू0स0 की पीठ पर बैठा था और आप स0 सज्दे में थे। मै दोबारा सज्दे में चला गया। जब रसू0 स0 ने नमाज पूरी फरमाई तो लोगों ने गुजारिश कीः या रसू0स0! आपने नमाज के दौरान में एक सज्दा इस कद्र लम्बा किया कि हमने समझा कोई हादसा हो गया है या आप को वह्यी आने लगी है। आपने फरमाया ऐसा कुछ भी नही हुआ बल्कि मेरा बेटा मेरी पीठ पर सवार हो गया तो मैने पसन्द न किया कि उसे जल्दी उतारूं यहां तक कि वह अपना दिल खुश कर ले। (निसाई 1142, हाकिम 4775)
☞ ह0 अबूहुरैरह रजि0 फरमाते हैं हम रसू0 स0 के हमराह नमाजे इशा अदा कर रहे थे। इस दौरान हसन और हुसैन रजि0 रसू0स0 की पीठ पर चढ़ गये। जब आपने सज्दे से सर उठाया तो बहुत नरमी के साथ उनको नीचे उतार दिया और जब दोबारा सज्दा किया तो इन दोनों फिर ऐसा किया। जब आप स0 नमाज से फारिग हुए तो एक को एक जानिब और दूसरे को दूसरी जानिब बिठा लिया। मैने रसू0स0 के करीब जाकर अर्ज किया या रसू0स0 क्या मैं इनको इनकी अम्मा के पास छोड़ आऊं? आप स0 ने इन्कार फरमा दिया। फिर एक बिजली सी चमकी, आप स0 ने हसन और हुसैन रजि0 से फरमाया तुम दोनों अपनी अम्मा के पास चले जावो। वह दोनो उसकी चमक में चलते चलते घर पहुंच गये। (मसनद अहमद 10669, हाकिम 4782)
☞ हजरत अली रजि0 फरमाते हैं कि रसू0 स0 ने इरशाद फरमायाः जन्नत में सबसे पहले मैं, फातिमा, हसन और हुसैन रजि0 दाखिल होगे। मैने अर्ज की या रसू0स0 हमसे मोहब्बत करने वाले? आप स0 ने फरमाया वह तुम्हारे पीछे होगे। (हाकिम 4723)
☞ ह0 इब्ने अब्बास रजि0 कहते हैं कि मैने एक मरतबा रसू0स0 को ख्वाब में देखा कि आपके बाल बिखरे हुए और जिस्म पर गर्द व गुबार था। आप स0 के पास एक बोतल थी जिसमें वह कुछ तलाश कर रहे थे। मैने अर्ज किया या रसूलल्लाह यह क्या है? आप स0 ने फरमाया यह हुसैन और उसके साथियों का खून है। मै सुबह से इसकी तलाश में लगा हुआ हूं। हदीस के रावी अमार कहते कि हमने वह तारीख अपने जहन में रखी। बाद में पता चला ह0 हुसैन रजि0 उसी दिन व तारीख को शहीद किये गये थे। (मसनद अहमद 2165)
☞ अब्दुल्लाह बिन नजी के वालिद एक मर्तबा हजरत अली रजि0 के साथ जा रहे थे। उनके जिम्मे हजरत अली के वजू की खिदमत थी। जब वह सिफीन की तरफ जाते हुए नैनवी के करीब पहुंचे तो हजरत अली रजि0 ने पुकार कर फरमाया अबू अब्दुल्लाह! फरात के किनारे पर रुक जाओ। मैने पूछा कि खैरियत है? फरमाया मै एक दिन नबी स0 की खिदमत में हाजिर हुआ तो आप स0 की आंखों से आसुओं की बारिश हो रही थी, मैने अर्ज किया या रसू0स0! क्या किसी ने आप को गुस्सा दिलाया है, खैर तो है कि आप के आंखों से आंसू बह रह रहे हैं? फरमाया ऐसी कोई बात नही है बल्कि बात ये है कि अभी थोड़ी देर पहले मेरे पास से जिब्राईल उठकर गये हैं। वह कह रहे थे कि हुसैन को फरात के किनारे शहीद कर दिया जायेगा। फिर उन्होने मुझसे कहा कि अगर आप चाहें तो मैं आप को उस मिट्टी की खुशबू सुंघा सकता हूं? मैने हां में जवाब दिया तो उन्होने अपना हाथ बढ़ाकर एक मुठ्ठी भरकर मिट्टी उठाई और मुझे दे दी। बस उस वक्त से अपने आंसुओं पर मुझे काबू नही है। (मसनद अहमद 648)
☞ ह0 उम्मुल फजल रजि0 फरमाती हैंः रसू0स0 ने मुझसे फरमाया (उस वक्त ह0 हुसैन रजि0 आप स0 के गोद में थे) बेशक मुझे जिब्राइल अलै0 ने बताया है कि मेरी उम्मत हुसैन रजि0 को शहीद कर देगी। (हाकिम 4824)
☞ हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि0 फरमाते हैं कि हमें इस बात में शक न था बल्कि अहलेबैत को यकीन था कि हजरत हुसैन बिन अली रजि0 मैदान (कर्बला) में शहीद कर दिये जायेगे। (हाकिम 4826)
☞ हजरत उम्मे सलमा रजि0 फरमाती हैं मैने हुसैन बिन अली रजि0 पर जिन्नों को नोहा करते हुए सुना। (तबरानी 2793)
☞ हजरत उम्मे सलमा रजि0 से मरवी है कि जब हजरत हुसैन रजि0 की शहादत का इल्म हुआ तो उन्होने अहले इराक पर लानत भेजते हुए फरमाया कि उन्होने हुसैन को शहीद कर दिया। उन पर खुदा की लानत हो। उन्होने हुसैन को धोका देकर तंग किया। उन पर खुदा की लानत हो। (मसनद अहमद 27085)
☞ ह0 अब्दुल्लाह बिन उमर रजि0 से एक शख्स ने (हालते एहराम में) मच्छर मारने के बारे में पूछा। ह0 इब्ने उमर रजि0 ने दरयाफ्त फर्माया तुम कहां के हो? उसने बताया कि इराक का। फर्माया इस शख्स को देखो (मच्छर की जान का मसला पूछता है) जबकि इसके मुल्क वालों रसू0स0 के नवासे को कत्ल कर डाला। मैने रसू0स0 से सुना है आप स0 फर्मा रहे थे कि ये दोनों (हसन व हुसैन रजि0) दुनिया में मेरे दो फूल हैं। (सहीह बुखारी 3753, 5994, तिर्मिजी 3770, तबरानी 2815)
☞ ह0 अनस बिन मालिक रजि0 बयान करते हैं कि जब हज़रत हुसैन रजि0 का सरे मुबारक उबैदुल्लाह बिन जियाद के पास लाया गया और एक तश्त में रख दिया गया तो वह बदबख्त उस पर लकड़ी से मारने लगा और आपके हुश्न और खूबसूरती के बारे में भी कुछ कहा। इस पर ह0 अनस रजि0 ने कहा कि हज़रत हुसैन रजि0 रसू0स0 से सबसे ज्यादा मुशाब थे। उन्होने वस्मा का खिजाब इस्तेमाल कर रखा था। (सहीह बुखारी 3748, तिर्मिजी 3778)
