मेंहदी की अहमियत
बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीम
अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
मेहंदी का दरख्त यानी पौधा अरब देशों के अलावा भारत, पाक, बांग्लादेश यानी एशिया में तकरीबन हर जगह पाया जाता है। दूसरी जबान में इसे हिना भी कहते हैं। इस पौधे की पत्तियों, शाखाओं और फूलों को बतौर दवा (औषधीय) और जेबाइश (सजावट) के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। मेंहदी का इस्तेमाल सदियों से ख्वातीन (महिलाओं) के जेबज़ीनत (श्रृंगार) में किया जाता रहा है, लेकिन इसके दवाओं की खुशीसियात (चिकित्सकीय गुण) इतने आम नहीं हैं।
इसके लगाने को खास तवज्जो सिर्फ औरतो के लिए ही हदीस में जिक्र आता है बल्कि औरत और मर्द की पहचान को अलग करने के लिए भी मेंहदी ही लगाने की ताकीद की गई है जैसा कि एक हदीस में आया है -
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि एक औरत पर्दे के पीछे से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को एक खत (चिट्ठी) देने लगी। आप स0 ने अपना हाथ खींच लिया और कहा, “मुझे नहीं पता कि यह हाथ किसी मर्द का है या औरत का।“ उसने कहा कि औरत की। तो आप स0 ने फरमाया “अगर तुम एक औरत हो, तो फिर कम से कम अपने नाखूनों को मेंहदी से रंग लेंती“ । (अबू दाऊद 1166, निसाई 5092)
एक दूसरी हदीस में औरत की जेबाइश के लिए हाथ में मेंहदी लगाने का हुक्म इस तरह है -
हज़रत आयशा रजि0 फरमाती हैं कि हिन्द बिन्त उतबा रजि0 ने रसू0 स0 से बैयत की दरख्वास्त की तो आप स0 ने फरमाया मैं उस वक्त तक बैयत न करूंगा जब तक तुम अपनी हथेलियों में मेंहदी न लगा लो। ये हाथ क्या किसी दरिन्दे की हथेली है। (अबूदाउद 4165, मिश्कात)
यानी मेंहदी औरतो के लिए जेब व जीनत के लिए बहुत अहम चीज है। और मर्दो को मेंहदी से जेब व जीनत करना ममनूह है। जैसा कि हदीस में आया है -
अबू हुरैरा रजि0 से रिवायत है कि रसू0 स0 के पास एक हिजड़ा लाया गया जो अपने हाथ पांव में मेंहदी लगा रखी थी। आप स0 ने अर्ज किया ये क्या हालत है? सहाबा रजि0 ने बताया यह औरतों जैसा बनता है। सहाबा ने अर्ज किया इसे कत्ल कर दूं आप स0 ने फरमाया मुझे नमाज पढ़ने वाले को मारने से मना किया गया है। फिर उसे मदीना से निकल जाने का हुक्म दिया। (सनन अबूदाउद)
यानी मर्दों को खूबसूरती के लिए हाथ या पांव में मेंहदी लगाना जायज नही क्योंकि इससे औरतों की मुशाबहत (समानता) होती है। आगे हम जानने की कोशिश करेगें कि औरतों के अलावा मर्दो को भी किस जगह और किस मकसद से मेंहदी लगा सकते हैं। कुछ हदीस पर तवज्जो दें -
उम्मुल-मोमिनीन हज़रत उम्मे सल्मा रिवायत करती है कि अल्लाह के रसूल स0 को जिन्दगी में न तो ऐसा कोई जख्म (घाव) हुआ न ही कांटा चुभा जिसमें मेंहदी न लगाई गई हो । (तिर्मिज़ी, मुसनद अहमद)
“जब भी कोई अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पैर दर्द की शिकायत लेकर आया, तो उन्होंने उसको मेंहदी लगाने की सलाह दी। (सहीय बुखारी, अबू दाऊद)
हज़रत अबू हुरैरा रिवायत करते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया, “यहूदी और ईसाई खिजाब नहीं लगाते, तुम इनकी मुखालफत करो। (सहीय मुस्लिम व बुखारी)
हज़रत वासला रजि0 रिवायत करते हैं कि नबी करीम स0 ने फरमाया ‘‘तुम्हारे पास मेंहदी मौजूद है। यह तुम्हारे सरों को पुरनूर बनाती है। तुम्हारे दिलों को पाक करती है। कूवत बाह (अग्नि शक्ति) में इजाफा करती है और कबर में तुम्हारी गवाह होगी। (इब्ने असाकिर)
हज़रत अनस बिन मालिक रजि0 रिवायत करते हैं मेंहदी का खिजाब लगाओ कि यह जवानी को बढ़ाती, हुश्न में इजाफा करती और बाह (ताकत) को बढ़ाती है। (अबू नइमा)
और कई हदीसों में सहाबा रजि0 का जिक्र हैं कि आप स0 को उनके बालों और दाढ़ी मुबारक में मेंहदी लगी हुई देखी।
नबी करीम स0 की जानिब से मेंहदी की बार बार तारीफ और इमाम बुखारी रह0 की जानिब से किताबत्तारीख की इस रिवायत के बाद कि ‘‘अल्ला के नजदीक दरख्तों में सबसे प्यारा मेंहदी का दरख्त है‘‘ मुहद्दिसीन ने इस पर पूरी तवज्जो और अहमियत दी है। सहाबा रजि0 में ह0 अबूबक्र रजि0, ह0 उमर रजि0 और अबू उबैदाह रजि0 और ताबईन में मुहम्मद बिन हनीफा रह0 और मुहम्मद बिन सीरीन रह0 अपने बाल मेंहदी से रंगते थे।
इन सारी हदीसों से जाहिर है कि मर्द अपने बालों और दाढ़ी के अलावा बतौर दवा कहीं भी मेंहदी लगा सकता है। जीनत और खूबसूरती के लिए सिर्फ दाढ़ी और बाल में ही मेंहदी (बतौर खिजाब) लगा सकता है।
मेंहदी के दीगर फायदे -
मेंहदी लगाने से फटे नाखून भी ठीक हो जाते हैं। मुहम्मद अहमद ज़हबी रह0 कहते हैं कि मेंहदी के पत्ते रात पानी में भिगोकर सुबह निचोड़कर इनका रस चीनी में मिलाकर चालीस दिन लगातार पिया जाये तो न सिर्फ जजाम (कोढ़) का इलाज होगा बल्कि घाव भी भर देगा।
हाफ़िज़ इब्ने कइम ने अपने तजुर्बात में बयान करते हैं कि यह आग से जले हुए का बेहतरीन इलाज है। इसे पानी में मिलाकर गरारे करने से गले, मुंह और जीभ के सभी घावों और मुंह के छालों में बहुत फायदा होता है। इसका लेप फोड़े-फुंसी और सूजन को कम करता है और मवाद न होने पर फोड़ा ठीक कर देता है। इसके लेप को गर्म करके उसमें मोम और गुलाब का तेल मिलाकर सीने के अतराफ (बाहरी) और कमर में दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द दूर करता है।
यह तो वाजेह है कि अगर चेचक के मरीज के पैरों के तलुवों में सुबह-शाम मेंहदी लगाई जाए तो उसकी आंखों की बीमारी से महफूज रहती है और चेचक के फोड़े जल्दी सूख जाते हैं।
इसका एक अजीब सिफत यह भी है कि अगर इसका जोशांदा (काढ़ा) उबलती चीनी में मिलाकर चालीस दिनों तक पिया जाए तो इब्तदाई (प्रारम्भिक) कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। इस जोशांदा के साथ मरीज को मुर्गे का गोस्त खाना चाहिए।
मेहंदी को अगर बाकायदी (नियमित रूप) से नाखूनों पर लगाया जाए तो यह उन्हें चमकदार और खूबसूरत बनाती है। पैरों पर लगाने से जिल्द (त्वचा) मुलायम होती है और टांगों की ऐंठन ठीक होती है। वह नाखून जो चोट लगने की वजह से काले पड़ जाये या सूजे हुए नाखून पर मेंहदी लगाने से नया नाखून साफ और खूबसूरत (सुंदर) दिखने लगता है। इस गरज के लिए अगर घोल में थोड़ा सा सिरका मिला लें तो फायदा जल्द हासिल हो जाता है।
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आपका भाई ― इक़बाल अहमद

Masallah
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