हदीस क्या होता है ?
बिस्मिल्लाहिर्रहमानीर्रहीमअस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह बरकातहु
हमारे बहुत सारे भाई इस बात से लाइल्म हैं कि हदीस होती क्या है तो हम आज हम इस आर्टिकल में जानेगे कि हदीस क्या होता है और इसकी कितनी किस्में होती हैं। इनके नाम भी जानेगें।
रसू0स0 की बतलाई हुई बात और उनके किए हुए अमल और दिये गये हुक्म को ही हदीस कहते हैं और इस पर अमल करना ही सुन्नत होती हैं। इन्शा अल्ला अगले आर्टिकल में सुन्नत के बारे में भी लिखेगें। रसूलल्लाह स0अ0स0 का फरमान कौली हदीस, आप का अमल फाली हदीस, आप की इजाजत तकरीरी हदीस कहलाती है। नबीए पाक स0 के जमाने में सहाबएकिराम रजि0 नबी पाक स0 की हर बात को याद रखते और कुछ सहाबी तो लिख भी लिया करते थे। बाद सहाबी के कुछ इमाम और मुहद्दिसीन ने पूरी तरह से हदीसों को इकट्ठा करने का काम किया और किताबी शक्ल में आवाम के बीच मौजूद है।
हदीस की किताबी शक्ल 100 साल के अरसे के बाद आनी शुरू हुई। इसकी वजह ये रही कि नबीस0 अपनी बात को लिखने को मना फरमाया था। आप स0 का ज्यादा तवज्जो कलामे इलाही पर था क्योंकि कुरान नबी-ए-पाक खुद लिखवाते थे। ईमान लाने वाले लोग कम थे इसलिए कलामे इलाही और आप का फरमान खलत मलत न हो जाय और दोनों में फर्क रहे।
कुछ अरसे बाद आप स0 ने हदीस लिखने की इजाजत दे दी लेकिन कुरान की तरह इसको बाजाब्ता लिखवाया नही गया। अलबत्ता बाज खास मौके पर खुद आप स0 ने फरामीन लिखवा कर मुख्तलिफ बादशाहों के नाम भेजवाये। खतूत इसकी वाजेह मिशाल हैं। जब इस्लाम तेजी से फैलने लगा तो दुश्मनाने इस्लाम की साजिस के तहत झूठी हदीस भी फैलने लगी। इससे बचने के लिए सबसे पहले सय्यदना उमर बिन अब्दुल अजीज रह0 ने इस का हुक्म जारी फरमाया कि अहादीस को किताबी शक्ल में लिखने और जमा करने का सिलसिला शुरू किया जाय। गोया सीना ब सीना उल्मा, हाफिज की मदद से मुन्तकिल होने वाली रिवायात को तहरीरी शक्ल में महफूज कर दी गई। अल्लाह ने जैसे कुरान की हिफाजत की जिम्मेदारी खुद ली है वैसे अल्ला ने ऐसे उल्माए किराम पैदा फरमाया जिन्होने अपनी सारी जिन्दगी मनगढ़त रिवायात को परखने और रसू0 स0 के सही इरशादात को अलग करने में कुरबान कर दी। आज हम इस फन की किताबों से लाखों रावियाने हदीस के हालात जिन्दगी जान सकते हैं जिन पर हदीस की सेहत या इसके जईफ होने का दारोमदार होता है। रावियों के उन्हीं हालात जिन्दगी की रोशनी में मुहद्दिसीन इकराम ने अहादीस की दर्जाबन्दी की और सहीय व जईफ और मौजू रिवायत को अलग किया।
आज हम सिर्फ उन कुतुब अहादीस का जिक्र करेगे जो कुरान के बाद इनका ही मर्तबा हासिल है। वह कुतुब हदीस सिर्फ छः हैं इन्हें सियाह सित्ता हदीस भी कहते हैं।
(1) बुखारी शरीफ - इसको अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद बिन इस्माइल अल-बुखारी ने तरतीब दी। इसकी 8 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 194हि0, 810ई0 और इन्तकाल सन् 256हि0, 870ई0 में हुई।
(2) मुस्लिम शरीफ - इसको अबू अल-हुसैन मुस्लिम इब्न अल हज्जाज नेशापुरी ने तरतीब दी। इसकी 6 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 202 या 204 या 206हि0, 817 या 819 या 821ई0 और इन्तकाल सन् 261हि0, 875ई0 में हुई।
(3) अबू दाउद - इसको अबूदाउद अल सिजिस्तानी ने तरतीब दी। इसकी 3 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 202हि0, 817ई0 और इन्तकाल सन् 275हि0, 889ई0 में हुई।
(4) तिर्मिजी शरीफ - इसको मुहम्मद इब्न ईशा अल-तिर्मिजी ने तरतीब दी। इसकी 2 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 209हि0, 824/825ई0 और इन्तकाल सन् 279हि0, 892ई0 में हुई।
(5) इब्ने माजा - इसको मुहम्मद बिन यजीद बिन माजा अल-रवीउल कजवीनी ने तरतीब दी। इसकी 2 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 209हि0, 824ई0 और इन्तकाल सन् 273हि0, 887ई0 में हुई।
(6) नसई शरीफ - अबू अब्दुर्रहमान अहमद बिन शुऐब खुरासानी ने तरतीब दी। इसकी 3 जिल्दें हैं। इनकी पैदाइश सन् 214हि0, 829ई0 और इन्तकाल सन् 303हि0, 915ई0 में हुई।
ये कुतुबअहदीस के अलावा मसनद अहमद, मिश्कात शरीफ, बैहकी, दार्मी, मूताइमाम मलिक और तमाम बहुत सारी हदीस की किताबें मौजूद हैं।
अब आगे हम जानते हैं कि हदीस पर अमल के लिहाज से दर्जा क्या है और किस हदीस को क्या कहते हैं।
सिहाह सित्ता - हदीस की छः कुतुब बुखारी, मुस्लिम, अबूदसउद, तिर्मिजी, निसाई और इब्ने माजा को गल्बा सेहत की बुनियाद पर सिहाह सित्ता कहा जाता है।
जामेअ - जिस किताब में इस्लाम के मुताल्लिक तमाम मुबाहस यानी चर्चाएं (अकायद, अहकाम, तफ्सीर जन्नत दोजख) वगैरह मौजूद हों वह जामेअ कहलाती है। मसलन- जामेअ तिर्मिजी
सनन- जिस किताब में सिर्फ अहकामात (आदेश) के मुताल्लिक हदीस जमा की गई हो वह सनन कहलाती है। मसलन- सनन अबूदाउद
मसनद- जिस किताब में तरतीबवार हर सहाबी की हदीस यकजा कर दी गई हो वह मसनद कहलाती है। मसलन- मसनद इमाम अहमद
मसतखुर्ज- जिस किताब में एक किताब की हदीस किसी दूसरे सनद से रिवायत की जाय वह मसतखुर्ज कहलाती है। मसलन- मसतखुर्ज अलइस्माइल अल बुखारी
मुस्तदरक- जिस किताब में एक मुहद्दिश की कायम करदा सरायत के मुताबिक वह हदीस जमा की जाय जो मुहद्दिश ने अपनी किताब में दर्ज न की हो। मसलन- मुस्तदरक हाकिम
अरबइन- जिस किताब में चालीस हदीस जमा की गई हो अरबइन कहलाती है। मसलन- अरबइन नूरी
अब हम हदीस की किस्में समझने की कोशिश करते है। हदीस की किस्में चार हैं।
किस्म1- मर्फूअ हदीस- जिस हदीस में सहाबी रसू0स0 का नाम लेकर हदीस बयान करे उसको मर्फूअ हदीस कहते हैं।
किस्म2- मौकूफ हदीस- जिस हदीस में सहाबी रसू0स0 का नाम लिए बगैर हदीस बयान करे या अपने ख्याल का इजहार करे मौकूफ हदीस कहलाती है।
किस्म3- मुतवातिर हदीस - जिस हदीस के रावी हर जमाने में इतने हों जिन का झूठ पर इकट्ठे होना मुमकिन न हो मुतवातिर कहलाती है।
किस्म4- आहाद हदीस- जिस हदीस के रावी तादाद में मुतवातिर हदीस के रावियों से कम हो अहाद कहलाती है। ये तीन तरह की होती है।
1- जिस हदीस के रावी हर जमाने में दो से जायद रहे हों मशहूर हदीस कहलाती है।
2- जिस के रावी किसी जमाने में कम से कम दो रहे हों। अजीज हदीस कहलाती है।
3- जिस हदीस के रावी किसी जमाने में एक रहा हो। गरीब हदीस कहलाती है।
मकबूल हदीस - जिस हदीस के रावियों की दयानत और सच्चाई तसलीम हो वह मकबूल हदीस कहलाती है। इसमें दो किस्में होती है।
(1) हसन हदीस - जिस हदीस के रावी सही हदीस के रावियों की नुसबत हाफिज में कम हो बाकी सरायत वही हो हसन हदीस कहलाती है।
(2) सहीय हदीस - जिस हदीस के रावी पहरेजगार और काबिले एतबार हाफिज के मालिक हो और सनद मुफस्सल हो वह सहीय हदीस कहलाती हैं। इसमें कई दर्जे है।
1- जिसे बुखारी और मुस्लिम दोनों ने रिवायत किया हो। मुत्तफिक अलैह भी कहते हैं।
2- जिसे सिर्फ बुखारी ने रिवायत किया हो।
3- जिसे सिर्फ मुस्लिम ने रिवायत किया हो।
4- जिसे बुखारी और मुस्लिम की शरायत के मुताबिक किसी दूसरे मुहद्दिस ने रिवायत किया हो।
5- जिसे सिर्फ बुखारी की शरायत के मुताबिक किसी दूसरे मुहद्दिस ने रिवायत किया हो।
6- जिसे सिर्फ मुस्लिम की शरायत के मुताबिक किसी दूसरे मुहद्दिस ने रिवायत किया हो।
7- जिसे बुखारी और मुस्लिम के अलावा दूसरे मुहद्दिस ने सही समझा हो।
गैर मकबूल हदीस - जिस हदीस के रावियों की दयानत (ईमानदारी) और सच्चाई में शुबा हो उसे गैर मकबूल हदीस कहते हैं।
जईफ हदीस - जो हदीस सहीय और हसन की शरायत पर पूरी न उतरे या जिस का कोई रावी साकित हो या मतउन हो वह जईफ हदीस कहलाती है। इसमें भी कई किस्म होती है।
(1) मुअल्लिक- जिस हदीस का एक या सारे रावी इब्तदाए सनद से मुनकता (अलग) हो। (2) मुनकतअ- जिस हदीस का एक या एक से ज्यादा रावी मुख्तलिफ मुकामात से साकित हो।
(3) मुर्सल- जिस हदीस का रावी आखिर सनद से साकित हो यानी ताबई के बाद सहाबी का नाम न हो।
(4) मुअज्जल - जिस हदीस के दो या दो से जायद इकट्ठे रावी सनद के दर्मियान से मुनकतअ (अलग़) हो।
(5) मौजू- जिस हदीस के रावी का हदीस के मामले में झूठ बोलना साबित हो।
(6) मतरूक- जिस हदीस के रावी पर सिर्फ झूठ की तोहमत हो लेकिन हदीस के मामले में झूठ साबित न हो।
(7) मुनकिर- जिस हदीस का रावी वहमी या फासिक या बिदअती हो।
इन्शा अल्ला आप लोगो तक जानकारी पहुंचाने की यह कोशिश कामयाब रही होगी फिर भी कोई गलती मिले तो हमें फौरन Comment में इस्लाह करें ताकि अवाम तक सही जानकारी पहुंच सके। और आप भी नेकी के हकदार बने।
आपका भाई 一 इकबाल अहमद

Mashallah
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